दो अश्क से बनी समंदर , समंदर से बनी सदा बहार ।
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Tuesday, January 29, 2013

GURU PURNIMA



Guru Brahma ,Guru Vishnu, Guru Devo Maheshwara, 
Guru Sakshat,Parabrahma,Tasmai Shri Gurave Namah, 
May Guru's Bless Always Shower On You Wish U Guru Purnima.

The Grace of God will be available in abundance on July 3rd, during the Full Moon of the Guru, known as Guru Purnima. Each Full Moon carries a special powerastrologically. But when the Full Moon is related to sheer Grace and Good Luck, as it is on July 3rd, we cannot help but speak of God. The realization that God is within you can be awakened and activated for the rest of your life on Guru Purnima. To "Be still and know that you are God" brings the power of peace and makes every aspect of your life effortless and sweet. Happy Guru Purnima.


गुरु ब्रह्मा गुरुर्विष्णु: गुरुदेव महेश्वर: ।
गुरु साक्षात्परब्रह्म तस्मैश्री गुरुवे नम: ।।

अनुग्रह परमेश्वर के गुरु पूर्णिमा, गुरु पूर्णिमा के रूप में जाना जाता है के दौरान, जुलाई 3 बहुतायत में उपलब्ध हो जाएगा. प्रत्येक पूर्णिमा एक विशेष शक्ति ज्योतिष की दृष्टि से किया जाता है. लेकिन जब पूर्णिमा सरासर अनुग्रह और गुड लक से संबंधित है, क्योंकि यह जुलाई 3, हम मदद नहीं है लेकिन भगवान की बात कर सकते हैं. अहसास है कि भगवान तुम्हारे भीतर है और जागृत गुरु पूर्णिमा पर अपने जीवन के आराम के लिए सक्रिय किया जा सकता है. करने के लिए "अभी भी रहो और पता है कि तुम भगवान शांति की शक्ति लाता है और अपने जीवन के हर पहलू को सरल और मीठा बना देता है. गुरु पूर्णिमा खुश.

(1) 
Sir,


Wish U Very Happy Guru Pornima
We always respect u & we are trying to be like u.
From: Your students

(2) 
May guru’s blessings


Always shower on you
Wish you a very very
Happy Guru Purnima 2012

(3) 
Guru Brahma Gurur Vishnu


Guru Devo Maheshwaraha
Guru Saakshat Para Brahma
Tasmai Sree Gurave Namaha

(4) 
As you walk with the Guru,


you walk in the light of Existence,
away from the darkness of ignorance.
You leave behind all the problems of your life and
move towards the peak experiences of life.


Guru Purnima Marathi Greetings:

(1) 
Aai mazi Guru, Aai kalpataru.


Aai mazi Pritiche maaher,
Manglyache saar Sarvaana sukhada paave
Ashi aarogya sampada Kalyan whave sarvanche
Koni dukkhi asu naye
Guru Poornimechya Hardik Shubhechha


Happy Guru Purnima English Quotes:


(1) 
Guru is Aspiration, Guru is Inspiration!

(2) 
When it comes to teaching -
you are the BEST! Happy Guru Purnima!!

(3) 
Be devoted to Guru, 
on this holy day and always!


Sanskrit Slokas for Guru Purnima:

(1) 
Agnyaana Timiraandhasya


Gnyaana Anjana Shalaakayaa
Chakshuhu Unmeelitam Yenam
Tasmai Sri Gurave Namaha.

(2) 
Sarva Sruti Shiroratna


Viraajita Padambujaha
Vedaantaambuja Sooryo Yah
Tasmai Sri Gurave Namaha.

(3) 
Gnyaana Shakti Samaaroodah


Tatwa Maalaa Vibhooshitaha
Bhukti Mukti Pradaaneyna
Tasmai sri Gurave Namaha

~ ~ Jai Shri Krishna ~ ~ 

~ ~ Sadah Bahar ~ ~ 

Sayana Ekadasi



Sayana Ekadasi or Devashayana Ekadashi or Padma Ekadasi or Vishnu Sayani Ekadashi is one of the most significant ekadashi upvaas. Shayana Ekadashi falls during the Shukla Paksha in the Ashada Month. Shayana Ekadasi is also referred as Maha Ekadashi in ‘Vajrotsava Chandrika’ and ‘Harivasara Ekadashi‘ in some other scriptures.This Ekadashi is also observed as Bhooripaksha Ekadasi.



After the day of Sayana Ekadasi vrata, Lord Vishnu goes to Yoganidra (meditation). Hence, all Gods worship him on the night of Dasami. So Sayana Ekadasi is also called as Vishnu Sayani Ekadasi or Padma Ekadashi. Lord Vishnu sleeps on Aadiseshu (divine serpent) as it also referred as Sesha Shayana Ekadashi. It is also popular as Ashadi Ekadasi. Sayana Ekadasi is also celebrated as Tholi Ekadashi or Toli Ekadashi in Andhra Pradesh. Tholi Ekadashi means the first Ekadashi in Telugu. Sayani Ekadasi is also called as Prathama Ekadashi or Pratham Ekadasi.

The importance and greatness of Devasayani Ekadasi is explained in Bhavishya-uttara Purana. When Yudhistira asked about the Shayana Ekadasi fasting and observance, Lord Sri Krishna explained the glory of Shayana Ekadashi vrata which was told earlier by Lord Brahma to Sage Narada. The most auspicious Chaturmasa Vrata starts on this Ekadasi day. In Maharashtra, Ashadi Ekadashi is also observed as closing ceremony day of Pandharpur Yatra.

Jai Shri Krishna !! 

Sadah Bahar

Ashadi एकादसी, भी Ashadhi एकादशी के रूप में वर्तनी, सबसे महत्वपूर्ण एकादसी vrata पहले एकादशी के रूप में मनाया
इस विशाल "यात्रा" या पंढरपुर के भगवान विठोबा, दक्षिण महाराष्ट्र में एक शहर है, भीमा नदी, कृष्णा नदी की एक सहायक नदी के तट पर स्थित तीर्थ का दिन है.
Ashadhi एकादशी एक धार्मिक जुलूस त्योहार की अधिक है और जून जुलाई (Aashaadh शुक्ल पक्ष) के महीनों के दौरान मनाया. लोग दो 11 दिन, हर महीने की एकादशी ", के लिए विशेष महत्व का हो पर विचार करें. लेकिन Ashadh (उज्ज्वल) के ग्यारहवें दिन महान एकादशी या Mahaekadashi के रूप में जाना जाता है. यह Mahaekadashi भी Shayani एकादशी के रूप में जाना जाता है, क्योंकि इस दिन विष्णु सो जाता है चार महीने बाद कार्तिक माह में Prabodhini एकादशी पर जगा. इस अवधि Chaturmas के रूप में जाना जाता है और बरसात के मौसम के साथ मेल खाता है.

Ashadhi एकादशी व्रत का दिन है और इस दिन पर लोगों को विशाल जुलूस में चलने जाने के संत तुकाराम और सेंट Dnyaneshwar Abhangas (भजन जप) गायन करने के लिए अपने भगवान विट्ठल पंढरपुर. यात्रा Allandi में शुरू होता है और पंढरपुर में गुरु पूर्णिमा के दिन पर समाप्त होता है.
 



~ ~ जय श्री राधे कृष्णा ~ ~ 

~ ~ सदा बहार ~ ~ 

राधा का अर्थ है मोक्ष की प्राप्ति



एक बार 'राधा' नाम का उच्चारण से मोक्ष की प्राप्ति होती है 
'रा' का अर्थ है मोक्ष 'धा' का अर्थ है प्राप्ति
कृष्ण जब वृन्दावन से मथुरा गए,तब से उनके जीवन में एक पल का भी विश्राम नहीं था
उन्होंने प्रजा की रक्षा की,राजाओं को लूटे हुए राज्य वापस दिला दिए
और सोलह हज़ार स्त्रियों को गरिमा प्रदान की
श्री कृष्ण ने किसी चमत्कार से लड़ाइयाँ नहीं जीती ,बल्कि बुध्धि योग और ज्ञान के आधार पर जीवन को सार्थक किया|
मनुष्य का जनम लेकर मानवता की रक्षा की, अधिकारों की रक्षा की , वे जीवन भर चलते रहे,कभी स्थिर नहीं रहे, जहाँ उनकी पुकार हुई वे सहायता में जुटे रहते
उधर जब कृष्ण वृन्दावन से गए गोपियाँ और राधा तो मानो अपना अस्तित्व हे खो चुकी थी
राधा ने कृष्ण के वियोग में सुधबुध ही खो दी
मानो प्राण न हो केवल काया ही रह गयी हो
राधा कृष्ण का प्रेम ऐसा अलोकिक था उसकी साक्षी थी यमुना जी की लहरें ,वृन्दावन की कुञ्ज गलियाँ ,कदम्ब के पेड़ , वोह बेला जब श्याम गायें चरा के वापस आते थे वोह मुरली के स्वर जो सदा हवाओं में विद्यमान रहती थी
राधा वनों में भटकती कृष्ण कृष्ण पुकारती अपने प्रेम को अमर बनती, उसकी पुकार सुन कर भी, कृष्ण ने एक बार भी पीछे मुड़कर नहीं देखा
किन्तु कृष्ण के हृदय का स्पंदन किसी ने नहीं सुना ,स्वयं उनको भी इतना समय नहीं मिला की वोह अपने दिल की बात सुन ले
जब अपने ही कुटुंब से व्यथित होकर वे प्रभास क्षेत्र में लेट कर चिंतन कर रहे थे तब 'जरा' के छोड़े हुए तीर की चुभन महसूस हुयी
तब भी उन्होंने देह त्यागते हुए 'राधा' नाम का उच्चारण किया
जिसे 'जरा' और 'उद्धव' को सुना जो उसी समय वहां आ गए
'उद्धव' की आँख से आंसू बहने लगे
सभी लोगों को कृष्ण का सन्देश देने के बाद जब वे 'राधा रानी' के पास पहुंचे , तो केवल इतना कह सके की राधा
"'कान्हा तो संसार के के थे,लेकिन कृष्ण तो केवल राधा के हृदय में है'"
राधा कृष्ण की जोड़ी आज इस संसार में अमर है आज भी उनके प्रेम की मिसाले दी जाती है
राधा की भक्ति करने से कृष्ण अपने आप भक्तों के पास खुद चले आते है, उनके दुःख दूर करने
मुझे खुद नहीं पता लगा इस नोट को लिखते हुए मेरे आंसू कब निकले
सच मानियेगा जब में लिख रहा था तब ऐसा लगा जैसे राधा माधव मेरे साथ है
मुझे देख रहे है ,मेरे साथ अपने होने एहसास दे रहे है
एक अलग सा एहसास बहुत अच्छा जो शायद हे में कभी देखा



~ ~ जय श्री राधे ~ ~ 



~ ~ सदा बहार ~ ~ 

ऐसी नजर मुझे दे दे कान्हा





ऐसी नजर मुझे दे दे कान्हा , मै अपनी बुराई देख सकूँ |

पर्वत बेशक न दिखाई दे स्वामी , पर मै अपने राहें देख सकूँ ||


उपकार तेरा होगा कान्हा मुझ पर , सारी दौलत से बढ़कर |

प्यार तेरा रंगेगा मुझको , कान्हा सारे रिश्तों से चढकर ||


बस इतना कर दे स्वामी , तेरी जय जय कार मै देख सकूँ |

ऐसी नजर मुझे दे दे कान्हा , मै अपनी बुराई देख सकूँ ||


इतनी करना दया मुझपर कान्हा , मै कभी न ढूंडू चतुराई |

तेरे चरणों में रह के स्वामी , बस जानू तेरी हरी नाम की उपकार ||


सारी दुनिया छोड़ कर मै, तेरे दर पर घुटने टेक सकूँ |

ऐसी नजर मुझे दे दे कान्हा , मै अपनी बुराई देख सकूँ ||


दुनिया के सभी विकारों से , स्वामी मै कोसो दूर रहूँ |

तेरी भक्ति की शक्ति से स्वामी , मै सदा भरपूर रहूँ ||


‘ दासी ’ हूँ मै तेरी कान्हा , तेरी दुनिया में अपनी दुनिया देख सकूँ |

ऐसी नजर मुझे दे दे कान्हा , मै अपनी बुराई देख सकूँ ||


हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे 

हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे 



~ ~ जय श्री राधे कृष्णा ~ ~ 


~ ~ सदा बहार ~ ~ 

कृष्ण नाम का विशवास




कान्हा तुम्हारे भावों में कोई शब्द नहीं,

मेरे शब्दों का कोई अर्थ नहीं,

तुम्हारे नाम के अर्थों में कोई तत्त्व नहीं, 

तुम्हारे नाम पर सब विश्वास करते क्यूँ नहीं ? 

पर दोस्तों को अपने ही दोस्तों पर विशवास नहीं,

एक बहार है जो हर मौसम से दोस्ती करती है,

फिर भी उन्हें ये पता नहीं , क्यूँ लड़ते है दोस्त अपने ही दोस्तों से ?

कान्हा तुम्हारे जैसे दोस्त लोग बनाते क्यूँ नहीं ?

कान्हा उन दोस्तों में तुम ऐसा एहेसास दिलाते क्यूँ नहीं ?

सदा की दोस्ती कान्हा तुमपर कभी कम होगा ही नहीं,

फिर भी लोगों को सदा पर विशवास नहीं,

कान्हा तुम्हारे भजनों में लोगों की भक्ति नहीं,

हरी नाम के मन्त्रों में लोगों को शक्ति नहीं,

हर मनुष्य के शक्लों में व्यक्ति नहीं,

किस पर विश्वास करें कान्हा ?

किसी के भी सुर में संगीत नहीं,

सावन के गीत में बहार नहीं,

लोग अपने आप में अब मीत नहीं, 

कान्हा हम फिर भी तुमपर विशवास करते है,

एक न एक दिन आएगा ऐसा , जब सब सदा पर विशवास करेंगे,

कृष्ण नाम हर गीतों के छंद में आएगा , बहारों में फूल खिलेगा, 

फूलों के महक के साथ कान्हा तुम्हारा नाम सदा रहेगा, 

सच्चे सम्बन्ध कभी नहीं टूटेंगे,

हर कोई सदा कृष्ण नाम पर विश्वास करेगा !


~ ~ सदा बहार ~ ~ 

प्रेम प्रवाह अनवरत




हरे कृष्ण भज मन प्रेम प्रवाह अनवरत,

मनमोहन सुमिरन का ले व्रत,

ज्योति जगा ले कृष्ण दिव्य दरस की ,

अपना ले नित ज्योतिर्मय पथ की,

सांस सांस जिससे नित आये,

पग-पग हरे कृष्ण गुण जब उसके गाये,

सहज कृपा रस वह बरसाए हरी का ,

उसको ध्याये, दीवानगी इतनी उसको पाए,

सारी सृष्टि, कृष्ण की सूरत को तरसता हो,

भज मन प्रेम प्रवाह अनवरत |


हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे,

हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे |


~ ~ जय श्री राधे कृष्णा  ~ ~ 




~ ~ सदा बहार  ~ ~ 

Sunday, December 30, 2012

भगवान् से ज़िन्दगी की वार्तालाप



किसी ने भगवान् से कहा :
मुझे ज़िन्दगी से नफरत है ।

भगवान् ने कहा :
तुम्हे किसने कहा की ज़िन्दगी से प्यार करो, 
तुम बस उसे चाहो जो तुम्हे अपने दिल से चाहता हो,
ज़िन्दगी अपने आप खुबसुरत हो जाएगी ।

~ ~ जय श्री राधे कृष्णा ~ ~ 

~ ~ सदा बहार ~ ~ 

Srila Prabhupada's Book


My Books Are The Windows,
To The Spiritual World. 
My Books Are Recorded Chanting. Anyone Who Reads My Books,
Are Hearing From Me.

Jai Shri Srila Prabhupada Maharaj
~ ~ Jai Shri Radhe Krishna ~ ~ 

~ ~ Sadah Bahar ~ ~ 

God Is Developing A Beautiful Future For You


Beautiful Picture Are,

Developed From Negative,
In Dark Room, 
So If Any Time,
You See Darkness,
In Your Life,
It Means God,
Is Developing A,
Beautiful Future For You !

~ ~ Jai Shri Radhe Krishna ~ ~ 

~ ~ Sadah Bahar ~ ~

Wednesday, November 14, 2012

गोवर्धन पूजा


"गोवर्धन पूजा की हार्दिक शुभकामना"दीपावली की अगली सुबह गोवर्धन पूजा की जाती है। लोग इसे अन्नकूट केनाम से भी जानते हैं। इस त्यौहार का भारतीय लोकजीवन में काफी महत्वहैइस पर्व में प्रकृति के साथ मानव का सीधा सम्बन्धदिखाईदेताहैइसपर्वकीअपनी मान्यता और लोककथा है। गोवर्धन पूजा में गोधन यानी गायोंकीपूजाकी जाती है । शास्त्रों में बताया गया है कि गाय उसी प्रकारपवित्रहोतीजैसेनदियों में गंगा। गाय को देवी लक्ष्मी का स्वरूप भी कहा गया है।देवीलक्ष्मीजिस प्रकार सुख समृद्धि प्रदान करती हैं उसी प्रकार गौ माता भी अपने दूध। 

सेस्वास्थ्य रूपी धन प्रदान करती हैं। इनका बछड़ा खेतों में अनाज उगाता है। इस तरह गौ सम्पूर्ण मानव जाती के लिए पूजनीय और आदरणीय है। गौ के प्रति श्रद्धा प्रकट करने के लिए ही कार्तिक शुक्ल पक्ष प्रतिपदा के दिन गोर्वधन की पूजा की जाती है और इसके प्रतीक के रूप में गाय की ।
जब कृष्ण ने ब्रजवासियों को मूसलधार वर्षा से बचने के लिए सात दिन तक गोवर्धन पर्वत को अपनी सबसे छोटी उँगली पर उठाकर रखा और गोप-गोपिकाएँ उसकी छाया में सुखपूर्वक रहे। सातवें दिन भगवान ने गोवर्धन को नीचे रखा और हर वर्ष गोवर्धन पूजा करके अन्नकूट उत्सव मनाने की आज्ञा दी। तभी से यह उत्सव अन्नकूट के नाम से मनाया जाने लगा।...!!!

नंदबाबा ने कहा- बेटा! भगवान इंद्र वर्षा करने वाले मेघों के स्वामी है, ये मेघ उन्ही के अपने रूप है, वे समस्त प्राणियों को तृप्त करने वाले एवं जीवनदान करने वाले जल बरसाते है. हम उन्ही मेघपति इंद्र की यज्ञ के द्वारा पूजा किया करते है उनका यज्ञ करने के बाद जो कुछ बचा रहता है उसी अन्न से हम सब मनुष्य अर्थ, धर्म, काम, की सिद्धि के लिए अपना जीवन निर्वाह करते है। 

भगवान ने कहा –

“श्रीकृष्ण की ने कहा ! प्राणी अपने कर्म के अनुसार ही पैदा होता और कर्म से ही मर जाता है उसे उसके कर्मो के अनुसार ही सुख-दुख भय और मंगलके निमित्तो की प्राप्ति होती है”

ये गौए, ब्राह्मण और गिरिराज का यजन करना चाहिये. इंद्र यज्ञ के लिए जो सामग्रियाँ इकठ्ठी की गयी है उन्ही से इस यज्ञ का अनुष्ठान होने दे .अनेको प्रकार के पकवान – खीर, हलवा, पुआ, पूरी, बनायें जाएँ, व्रज का सारा दूध एकत्र कर लिया जाये, वेदवादी ब्राहाणों के द्वारा भलीभांति हवन करवाया जाये फिर गिरिराज को भोग लगाया जाये इसके बाद खूब प्रसाद खा-पीकर सुन्दर-सुन्दर वस्त्र पहनकर गोवर्धन की प्रदक्षिणा की जाये, ऐसा यज्ञ गिरिराज और मुझे भी बहुत प्रिय है। 

भगवान की इच्छा थी कि इंद्र का घमंड चूर-चूर कर दे. नंदबाबा आदि गोपो ने उनकी बात बड़ी प्रसन्नता से स्वीकार कर ली . भगवान जिस प्रकार का यज्ञ करने को कहा था वैसे यज्ञ उन्होंने प्रारंभ कर दिया .सबने गिरिराज और ब्राह्मणों को सादर भेटे दी, और गौओ को हरी-हरी घास खिलाई फिर गोपिया भलीभांति श्रृंगार करके और बैलो से जुटी गाडियों पर सवार होकर भगवान कृष्ण की लीलाओ का गान करती हुई गिरिराज की परिक्रमा करने लगी. भगवान श्रीकृष्ण गिरिराज के ऊपर एक दूसरा विशाल शरीर धारण करके प्रकट हो गये और ‘मै गिरिराज हूँ’ इस प्रकार कहते हुए उन्होंने अपना बड़ा-सा मुहँ खोला और छप्पन भोग और सारी सामग्री पात्र सहित आरोगने लगे. आन्यौर-आन्यौर,और खिलाओ,और खिलाओ इस प्रकार भगवान ने अपने उस स्वरुप को दूसरे ब्रजवासियो के साथ स्वयं भी प्रणाम किया और कहने लगे – देखो कैसा आश्चर्य है, गिरिराज ने साक्षात् प्रकट होकर हम पर कृपा की है.और पूजन करके सब व्रज लौट आये। 

जब इंद्र को यह पता चला की मेरी पूजा बंद कर दी गयी है तब वे नंदबाबा और गोपो पर बहुत ही क्रोधित हुए इंद्र को अपने पद का बड़ा घमंड था वे स्वयं को त्रिलोकी का ईश्वर समझते थे उन्होंने क्रोध में तिलमिलाकर प्रलय करने वाले मेघों के संवर्तक नामक मेघों को व्रज पर चढ़ाई करने की आज्ञ दी. और स्वयं पीछे-पीछे ऐरावत हाथी पर चढ कर व्रज का नाश करने चल पड़े। 

इस प्रकार प्रलय के मेघ बड़े वेग से नंदबाबा के व्रज पर चढ़ आये और मूसलाधार पानी बरसाकर सारे ब्रज को पीड़ित करने लगे चारो ओर बिजलियाँ चमकने लगी. बादल आपस में टकराकर कडकने लगे और प्रचण्ड आँधी की प्रेरणा से बड़े-बड़े ओले और दल-के-दल बादल बार-बार आ-आकर खम्भे के समान मोटी-मोटी धाराएँ गिराने लगे. तब व्रजभूमि का कोना-कोना पानी से भर गया और वर्षा की झंझावत झपाटे से जब एक–एक पशु और ग्वालिने भी ठंड के मारे ठिठुरने और व्याकुल हो गयी. तब सब-के-सब भगवान श्रीकृष्ण की शरण में आये, सब बोले - कृष्ण अब तुम ही एकमात्र हमारे रक्षक हो, इंद्र के क्रोध से अब तुम्ही हमारी रक्षा कर सकते हो। 

भगवान ने देखा तो वे समझ गये कि ये सब इंद्र की करतूत है वे मन-ही-मन कहने लगे हमने इंद्र का यज्ञ भंग कर दिया है इसी से व्रज का नाश करने के लिए बिना ऋतु के ही यह प्रचंड वायु और ओलो के साथ घनघोर वर्षा कर रहे है मै भी अपनी योगमाया से इसका भालिभाँती जवाव दूँगा . इस प्रकार कहकर भगवान ने खेल-खेल में एक ही हाथ से गिरिराज गोवर्धन को उखाड़ लिया और जैसे छोटा बच्चा बरसाती छत्ते के पुष्प को उखाडकर हाथ में रख लेते है वैसे ही उन्होंने उस पर्वत को धारण कर लिया। 

इसके बाद भगवान ने कहा – मैया, बाबा और व्रजवासी तुम लोग अपनी गौओ और सब सामग्रियों के साथ इस पर्वत के गड्डे में आकर आराम से बैठ जाओ तब सब-के-सब ग्वालबाल छकडे, गोधन लेकर अंदर घुस गये.थोड़ी देर बाद कृष्ण के सखाओ ने अपनी अपनी लाठिया गोवर्धन पर्वत में लगा दी और कृष्ण से कहने लगे कि ये मत समझना कि केवल तुम ही उठाये हुए हो तब कृष्ण जी ने कहा -
------------------------------------------------------
"कछु माखन को बल बढ्यो कछु गोपन करि सहाय।।
श्री राधा जू कि कृपा से मेने गिरिवर लियो उठाय "  ।।
------------------------------------------------------
भगवान ने सब व्रजवासियो के देखते-देखते भूख प्यास की पीड़ा आराम-विश्राम की आवश्यकता आदि सब कुछ भुलाकर सात दिन तक लगातार उस पर्वत को उठाये रखा वे एक पग भी वहाँ से इधर-उधर नही हुये। 

श्रीकृष्ण की योगमाया का यह प्रभाव देखकर इंद्र के आश्चर्य का ठिकाना न रहा अपना संकल्प पूरा न होने के कारण उनकी सारी हेकड़ी बंद हो गयी. उन्होंने मेघों को अपने-आप वर्षा करने से रोक दिया. जब आकाश में बादल छट गये और सूरज देखने लगे तब सब लोग धीरे-धीरे सब लोग बाहर निकल आये सबके देखते-ही-देखते भगवान ने गिरिराज को पूर्ववत् उसके स्थान पर रख दिया .और व्रज लौट आये . व्रज पहुँचे तो ब्रजवासियों ने देखा कि व्रज की सारी चीजे ज्यो-की-त्यों पहले की तरह है एक बूंद पानी भी कही नहीं है। 

तब ग्वालो ने श्रीकृष्ण से पूंछा –कान्हा सात दिन तक लगातार इतना पानी बरसा सब का सब पानी कहाँ गया .भगवान ने सोचा – यदि मै इन ग्वालवालो से कहूँगा कि मैने शेष जी और सुदर्शन चक्र को व्रज के चारों ओर लगा रखा था ताकि व्रज में पानी न आये.तो ये व्रजवासियो को विश्वास नहीं होगा। 

इसलिए भगवान ने कहा – तुम लोगो ने गिरिराज जी को इतना भोग लगाया, पर किसी ने पानी भी पिलाया इसलिए वे ही सारा पानी पी गये .तब सब ने कहा – लाला गिरिराज जी ने इतना खाया कि हम लोग उन्हें पानी पिलाना ही भूल गये। 

एक दिन भगवान जब एकांत में बैठे थे तब गोलोक से कामधेनु और स्वर्ग से इंद्र अपने अपराध को क्षमा माँगने के लिए आये उन्होंने हाथ जोड़कर १० श्लोको में भगवान की स्तुति की . फिर कामधेनु ने अपने दूध से और इंद्र ने ऐरावत की सूंड के द्वारा लाए हुए आकाश गंगा के जल से देवर्षियो के साथ यदुनाथश्रीकृष्ण का अभिषेक किया और उन्हें ‘गोविन्द’ नाम से संबोधित किया इसके बाद वे स्वर्ग चले गये। 

जय श्री कृष्णा 

सदा बहार 

Friday, November 2, 2012

Karwa Chauth


What Is Karwa Chauth ?

'Karwa Chauth' is a ritual of fasting observed by married Hindu women seeking the longevity, well-being and prosperity of their husbands. It is popular amongst married women in the northern and western parts of India, especially, Haryana, Punjab, Rajasthan, Uttar Pradesh and Gujarat.

What The Term,
Karwa Chauth Means ?

The term 'Chauth' means the 'fourth day' and 'Karwa' is an earthen pot with a spout - a symbol of peace and prosperity - that is necessary for the rituals. Hence the name 'Karwa Chauth'.

Happy Karwa Chauth 

Jai Shri Radhe Krishna !!

Sadah Bahar 

Monday, October 29, 2012

knowledge & full Bliss.


Forgetfulness is caused by the Illusory Energy of Lord (Maya).
Once the influence of this illusory energy get reduced one will began to see Bhagavan, who has the complexion of Dark Cloud, who is in yellow dress, with a beautiful flute in hand and with a Peacock feather on the head.
The wish to be with Lord and to do His devotional service surpasses all material desires and even the wish of liberation.

sadah bahar 

Saturday, October 20, 2012

कान्हा तेरे प्यार


छूया है तेरे प्यार ने मुझे इस कदर,
जितना कल्पना किया था उससे कही गुना ज्यादा,
कि में सँभालते सँभालते थक जाती हूँ,
गली-गली, शहर-शहर,
तेरी रानी बनी फिरती हूँ,
सिर्फ तलाश करती फिरती हूँ,
तेरे चेहरे की एक झलक पाने के लिए,
तालाब के किनारे पर थिरकते रहे जाती हूँ,
हर मौसम में हर मिजाज़ में,
तेरे ही बांसुरी के आवाज़ की कल्पना करते रहती हूँ,
कान्हा में तेरी रानी बनी फिरती हूँ,
न पूछ मेरी दीवानगी का सबब
तू वो बंदगी है जिसपर में फ़िदा होकर मरती हूँ,
सोते-जागते, उठते-बैठते,
तेरे ही नाम की माला जपती हूँ,
तू पास हो या न हो पर में तेरी परछाई को निहारती हूँ,
तेरी याद में रोज़ में फूलों से संवरती हूँ,
हँसती -खेलती, नाचती-गाती,
में तेरी सपनों की रानी हूँ कान्हा। 

जय श्री राधे कृष्णा 

सदा बहार 

Wednesday, October 17, 2012

Chanting the holy name


Chanting the holy name in ecstasy causes Me to dance, laugh and 
cry.’ When My spiritual master heard all this, he smiled and then began to speak.”

Life is tough without the holy names. Hare Krishna Hare Krishna Krishna Krishna Hare Hare Hare Rama Hare Rama Rama Rama Hare Hare ! Hari Hari BOL

PURPORT

When a disciple very perfectly makes progress in spiritual life, this gladdens the spiritual master, who then also smiles in ecstasy, thinking, “How successful my disciple has become!” He feels so glad that he smiles as he enjoys the progress of the disciple, just as a smiling parent enjoys the activities of a child who is trying to stand up or crawl perfectly. 

jai shri krishna 

sadah bahar 

Thursday, October 11, 2012

INDIRA EKADASHI


Hari Bol Jai Nitai GaurhariShri Chaitanya Bhagavata..

Life is tough without the holy names. Hare Krishna Hare Krishna Krishna Krishna Hare Hare Hare Rama Hare Rama Rama Rama Hare Hare ! Hari Hari BOL GOOD NIGHT ALL.

Lord Gauranga instructs Shri Tapana Mishra in Shri Chaitanya-bhagavata Adi-khanda 

hare krishna hare krishna krishna krishna hare hare;
hare rama hare rama rama rama hare hare. 

ei shloka nama bali’ laya maha-mantra;
shola-nama batrisha-akshara ei tantra. 

“This verse is called the maha-mantra. It contains sixteen holy names of the Lord composed of thirty-two syllables.

sadhite sadhite yabe premankura habe;

adhya-sadhana-tattva janiba se tabe. 
“If you continually and sincerely chant this maha-

jai shri krishna

hari hari bol 

sada bahar 

Sunday, October 7, 2012

हरी नाम निर्मल भाया


हरी नाम निर्मल भाया , जैसे गंगा नीर !
पाछे पाछे हरी फिरे , कहत कृष्ण कृष्ण.!

हरी नाम कहते रह हर सुबह शाम !
मेरा मन ऐसा पवित्र हो गया है ! 

जैसे एक बूंद गंगा जल !
और हरि स्वयं मेरे पीछे फिरते रहे !

कहते हुए हरे कृष्ण हरे राम !
हरी नाम निर्मल भाया हर सुबह शाम !

यह तो सच है कि भगवान है !
है मगर फिर भी अंजान है !

उस परम शक्ति से करते हैं हम !
हरी नाम की प्रार्थना,

उनकी छ्या रहे सभी के माथे पे !
एक पल रह सके ना हम हरीके बिना ! 

हरी नाम निर्मल भाया , जैसे गंगा नीर !
पाछे पाछे हरी फिरे ,कहते हुए हरे कृष्ण हरे राम !

जय श्री कृष्णा 

सदा बहार

Saturday, October 6, 2012

क्या आप सभी को पितृ पक्ष का मतलब पता है ?


पितृ पक्ष का मतलब बहुत कुछ है,
सिर्फ श्रद्धा ही नहीं है,
सगे सम्बन्धी माता-पिता, 
दोस्त-यार, भाई-बहन,
इनमे से आज जो जीवित नहीं है,
भगवन श्री कृष्णा जी ने भी,
अपने माता-पिता को,
लोहे का पिंड दान किया था,
उन्हें इस पितृ पक्ष के समय में,
सूर्यास्त से पहले अर्ध देना,
और सूर्यास्त के बाद पानी चढ़ाना,
तर्पण करना और श्रद्धा का कार्यक्रम करना,
किसी गरीब पंडित को,
दान करना और भोजन करना,
पीपल के पेड़ पर पानी भी देना,
इस पक्ष में हर मनुष्य अपने शुद्ध मन से,
अगर अपने परिजन का तर्पण करता है,
तो उसको मनचाहा वरदान मिलता है,
उनके जीवित रहते हमने उनका श्रद्धा,
या सेवा न किया हो,
तो इस पक्ष पर करने से,
उनके आत्मा को शांति मिलती है,
और उनका आत्मा हमे वरदान देता है,
जैसे संतान प्राप्ति, सुख, 
शांति, समृद्धि, अच्छा कर्म,
किसी भी बिज़नस में बढ़ोतरी,
जो अ-विवाहित है,
उनका शादी का योग बनेगा,
अगर किसी व्यक्ति ने कभी,
भूले भटके कोई गुनाह किया है,
तो इस पक्ष पे श्रद्धा या तर्पण करने से,
मनोकामनाये पूर्ण होते है,
सभी के आत्मा को शांति मिले। 

जय श्री कृष्णा 

सदा बहार